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यूजीसी नियमों के विरोध में बिजनौर में प्रदर्शन

करणी सेना ने छात्र-शिक्षक हित और उच्च शिक्षा में समान अवसर का मुद्दा उठाया, राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

यूजीसी नियमों के विरोध में बिजनौर कनक्ट्रेट में करणी सेना के कार्यकर्ता धरना देते हुए। (फोटो)

      बिजनौर, 18 सितंबर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2026 के समानता संबंधी नियमों को लेकर करणी सेना ने शुक्रवार को बिजनौर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष एवं भारतीय किसान यूनियन (जनशक्ति) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप चौहान के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने कलक्ट्रेट परिसर में जनसभा कर नियमों को वापस लेने की मांग उठाई।
जनसभा में छात्र-छात्राओं, युवाओं, शिक्षकों और नागरिकों ने उच्च शिक्षा से जुड़े नियमों औरउनके प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा से संबंधित नीतियां बनाते समय सवर्ण समाज के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षाविदों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और शिक्षकों की चिंताओं को भी नीति-निर्माण में उचित स्थान देने की मांग की।

करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष एवं भारतीय किसान यूनियन (जनशक्ति) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप चौहान प्रेसवार्ता करते हुए। (फोटो-अरूण कुमार)

       प्रदर्शनकारियों ने छात्र हित, शिक्षक हित, सामाजिक न्याय, उच्च शिक्षा की स्वायत्तता तथा समान अवसर से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में आरक्षण, छात्रवृत्ति और विद्यार्थियों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े प्रावधानों को लागू करते समय पारदर्शिता और सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद आवश्यक है।
प्रदर्शन के बाद करणी सेना की ओर से जिलाधिकारी बिजनौर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और यूजीसी अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में यूजीसी से संबंधित मौजूदा विवादित व्यवस्था को वापस लेने तथा भविष्य में किसी नई नीति को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद और विचार-विमर्श किए जाने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा से संबंधित नीतियां पारदर्शी प्रक्रिया और व्यापक परामर्श के आधार पर बनाई जानी चाहिए।
ज्ञापन सौपने वालो में शेर सिंह राणा, अमित चौहान, प्रदीप चौहान, ललित चौहान, दीपक चौहान, रसिक चौहान आदि सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल थे।

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