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मशरूम स्टार्टअप : कम जगह में शुरू करें रोजगार का नया कारोबार

ऑयस्टर, बटन और मिल्की मशरूम के साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडेड उत्पादों में भी अवसर

नई दिल्ली। मशरूम की खेती कम जगह में शुरू होने वाला ऐसा व्यवसाय है, जिसे किसान, युवा, महिलाएं और छोटे उद्यमी अपनी क्षमता के अनुसार शुरू कर सकते हैं। उत्पादन के साथ मशरूम की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग करके कारोबार को आगे बढ़ाया जा सकता है।

भारत में मशरूम अनुसंधान और तकनीक के क्षेत्र में ICAR-Directorate of Mushroom Research (DMR), सोलन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान खाद्य एवं औषधीय मशरूम के उत्पादन, स्पॉन तकनीक और किसानों के प्रशिक्षण पर काम करता है।

ऑयस्टर से लेकर बटन मशरूम तक कई विकल्प

मशरूम कारोबार में ऑयस्टर/ढिंगरी, बटन, मिल्की, शिटाके और अन्य विशेष मशरूम की खेती की जा सकती है। कौन-सी किस्म चुनी जाए, यह क्षेत्र के तापमान, बाजार, उपलब्ध तकनीक और निवेश क्षमता पर निर्भर करता है।

शुरुआती उद्यमियों के लिए कम लागत वाले छोटे यूनिट से शुरुआत करना और बाजार तैयार होने के बाद उत्पादन बढ़ाना व्यावहारिक तरीका हो सकता है।

सरकारी सहायता से मिल सकता है कारोबार को सहारा

मशरूम उत्पादन के लिए Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) के तहत सहायता उपलब्ध है। 2025 के परिचालन दिशानिर्देशों में निजी क्षेत्र के मशरूम उत्पादन, स्पॉन और कम्पोस्ट इकाइयों के लिए सामान्य क्षेत्रों में 40 प्रतिशत तथा कुछ विशेष क्षेत्रों में 50 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है। छोटे/लो-कॉस्ट मशरूम यूनिट के लिए भी 50 प्रतिशत सहायता का प्रावधान दिया गया है। पात्रता और वास्तविक राशि परियोजना के अनुसार तय होती है।

मशरूम से बने सूखे मशरूम, पाउडर, सूप मिक्स और अन्य खाद्य उत्पादों की प्रोसेसिंग करने वाले पात्र उद्यमी PMFME योजना की सहायता भी देख सकते हैं। PMFME में पात्र खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 35 प्रतिशत क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी, अधिकतम ₹10 लाख प्रति यूनिट का प्रावधान है।

प्रशिक्षण और स्पॉन के लिए ICAR से जुड़ें

मशरूम व्यवसाय शुरू करने से पहले प्रशिक्षण लेना बेहद जरूरी है। ICAR-Directorate of Mushroom Research, सोलन द्वारा उद्यमियों के लिए मशरूम उत्पादन तकनीक पर प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं। 2026 के ICAR प्रशिक्षण कैलेंडर में भी DMR सोलन के उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल रहे हैं।

इसके अलावा स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और राज्य कृषि/बागवानी विभाग से प्रशिक्षण तथा तकनीकी जानकारी ली जा सकती है।

उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग पर दें जोर

ताजा मशरूम जल्दी खराब हो सकता है। इसलिए मशरूम को सुखाकर, पाउडर बनाकर या अन्य खाद्य उत्पादों में बदलकर उसकी शेल्फ लाइफ और बाजार की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती हैं।

स्थानीय मंडी, होटल, रेस्टोरेंट, किराना दुकानों, सुपरमार्केट, ऑनलाइन बिक्री और अपने ब्रांड के माध्यम से बाजार तैयार किया जा सकता है। निर्यात के लिए अलग से गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और निर्यात संबंधी नियमों का पालन करना जरूरी होगा।

2026 में इंटीग्रेटेड मशरूम यूनिट बन सकता है बेहतर मॉडल

एक ही यूनिट में मशरूम उत्पादन + प्रोसेसिंग + पैकेजिंग को जोड़कर उद्यमी अपनी आय के कई स्रोत बना सकता है। मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाले कृषि अवशेषों से कम्पोस्ट तैयार करने की संभावना भी देखी जा सकती है।

हालांकि मशरूम कारोबार में उत्पादन और मुनाफा मौसम, तकनीक, स्पॉन की गुणवत्ता, बाजार भाव, रोग नियंत्रण और बिक्री व्यवस्था पर निर्भर करता है। इसलिए ₹2-3 लाख मासिक मुनाफे या कुछ महीनों में निवेश वापस होने को निश्चित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।

कम जगह, तकनीक और बाजार—मशरूम में रोजगार की संभावना

मशरूम की खेती ग्रामीण युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए कम जगह में शुरू होने वाला वैकल्पिक कृषि व्यवसाय बन सकती है। सही प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण स्पॉन, नियंत्रित वातावरण, बाजार की जानकारी और सरकारी योजनाओं की पात्रता का लाभ लेकर इसे धीरे-धीरे बड़े कारोबार में बदला जा सकता है।

इच्छुक किसान और युवा क्या करें?

सबसे पहले नजदीकी KVK/कृषि या बागवानी विभाग से प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी लें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार परियोजना तैयार कर बैंक तथा संबंधित सरकारी विभाग से वर्तमान योजना और पात्रता की पुष्टि करें।

– डॉ. जितेन्द्र पासवान – SC-ST की आर्थिक क्रांति दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से जनहित में जारी।

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