बिजनौरयूपी

बिजनौर वाले हो जाएं चौकस, हरिद्वार से गंगा में छोड़ा गया भारी पानी

1.26 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज के बाद प्रशासन अलर्ट, डीएम-एसडीएम ने संभाला मोर्चा; 32 बाढ़ चौकियां और 35 आश्रय स्थल सक्रिय

बिजनौर, 20 अगस्त। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच हरिद्वार बैराज से गंगा में 1.26 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बिजनौर में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। गंगा और खोह नदी का जलस्तर बढ़ने से चांदपुर और बिजनौर तहसील क्षेत्र के करीब 11 गांवों की कृषि भूमि में जलभराव की स्थिति बनी है। हालांकि आबादी वाले क्षेत्र फिलहाल सुरक्षित हैं और जनजीवन सामान्य बताया गया है।

स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी जसजीत कौर और एसडीएम चांदपुर प्रशांत वर्मा ने प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। डीएम ने बाढ़ चौकियों को 24 घंटे सक्रिय रखने, प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को जरूरत के अनुसार घर-घर भेजने के निर्देश दिए हैं।

बढ़ापुर में खोह नदी से कटान का खतरा

पहाड़ों में भारी बारिश के चलते खोह नदी का जलस्तर बढ़ने से नगीना तहसील के बढ़ापुर क्षेत्र के गांवों में कटान की आशंका बनी। डीएम ने सिंचाई, वन विभाग, तहसील और पुलिस अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने कटान रोकने के तकनीकी इंतजाम करने और नदी किनारे बसी आबादी की सूची तैयार रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तत्काल बाढ़ आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया जा सके।

चांदपुर के गांवों में पानी, नावें तैनात

चांदपुर तहसील के जलीलपुर ब्लॉक क्षेत्र के दतियाना, रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी के संपर्क मार्गों पर करीब 1 से 1.5 फीट पानी पहुंच गया है। हालांकि गांवों का संपर्क नहीं टूटा है और ग्रामीण ट्रैक्टरों के जरिए आवागमन कर रहे हैं। एहतियात के तौर पर 10 और 25 सीटर क्षमता की दो नावें तैनात की गई हैं। प्राथमिक विद्यालयों में चार बाढ़ राहत चौकियां स्थापित कर राजस्व कर्मियों की रोस्टरवार तैनाती की गई है।

300 राशन किट वितरित, एसडीआरएफ-एनडीआरएफ से समन्वय

प्रभावित 11 गांवों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से करीब 300 राशन किट वितरित किए जा चुके हैं। अतिरिक्त राहत सामग्री का बफर स्टॉक भी तैयार रखा गया है। सुरक्षा के लिए फ्लड पीएसी तैनात की गई है और एसडीआरएफ व एनडीआरएफ के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग की टीमें भी तहसील एवं ब्लॉक स्तर पर तैनात हैं।

पानी उतरने के बाद होगा फसल क्षति का सर्वे

खेतों में गंगा का पानी पहुंचने से गन्ने समेत अन्य फसलों को नुकसान की आशंका है। प्रशासन के अनुसार पानी उतरने के बाद राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम सर्वे करेगी। फसल में 33 प्रतिशत से अधिक क्षति पाए जाने पर शासन की निर्धारित दैवीय आपदा नियमावली के तहत किसानों को आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा।

32 बाढ़ चौकियां और 35 आश्रय स्थल सक्रिय

जिला आपदा प्रबंधन के अनुसार जिले में 32 बाढ़ चौकियां और 35 बाढ़ आश्रय स्थल सक्रिय किए गए हैं। सिंचाई विभाग के अनुसार 24 संवेदनशील और पांच अति संवेदनशील इलाके चिह्नित हैं। गंगा और खोह नदी के जलस्तर की 24 घंटे निगरानी के लिए गेज स्थापित किए गए हैं।

हर दो घंटे में मॉनिटरिंग, ‘सचेत ऐप’ से अलर्ट

जिला कंट्रोल रूम से हर दो घंटे में एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ, ईओ, तटीय गांवों के प्रधानों और आपदा मित्रों को मौसम एवं जलस्तर की जानकारी देकर अलर्ट किया जा रहा है। ‘सचेत ऐप’ के माध्यम से भी संभावित खतरे की सूचना दो से तीन घंटे पहले मिलने से प्रशासन को तैयारियों में मदद मिल रही है।

प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं और प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करें।

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