राष्ट्रीय पंचायत | विशेष पड़ताल
भारतीय लोकतंत्र में चुनाव केवल विचारों की लड़ाई नहीं रहे, अब वे संसाधनों की लड़ाई भी बन चुके हैं। चुनाव आयोग में जमा ऑडिट रिपोर्टों और आयकर विवरणों की पड़ताल बताती है कि देश की राजनीतिक व्यवस्था में धन का केंद्रीकरण अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच चुका है। वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) न केवल सबसे अमीर पार्टी है, बल्कि उसके पास मौजूद संपत्ति और आय अन्य राष्ट्रीय दलों को मिलाकर भी कई गुना अधिक है।
भाजपा के पास सबसे बड़ा राजनीतिक खजाना
- कुल संपत्ति : ₹12,171 करोड़
- देश में नंबर 1
- वित्त वर्ष 2024-25 आय : ₹6,769 करोड़
- पिछले वर्ष से 55.95% अधिक
लगभग शून्य कर्ज : ₹0.15 करोड़
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार भाजपा की कुल संपत्ति ₹12,171.18 करोड़ है। यह राशि देश की दूसरी सबसे अमीर पार्टी तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति (BRS) से लगभग आठ गुना अधिक है। भाजपा की वर्तमान परिसंपत्तियाँ (Current Assets) ही लगभग ₹9,996 करोड़ हैं, जबकि कुल उधारी केवल ₹0.15 करोड़ दर्ज की गई है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भाजपा ने ₹6,769.15 करोड़ की वास्तविक आय अर्जित की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 55.95 प्रतिशत अधिक है। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि वर्ष 2001-02 में भाजपा की आय मात्र ₹44.23 करोड़ थी। 23 वर्षों में यह आय 153 गुना बढ़कर ₹6,769 करोड़ तक पहुँच गई।
सबसे अमीर दल: शीर्ष 10
| दल | कुल संपत्ति (₹ करोड़) |
|---|---|
| भाजपा | 12,171.18 |
| BRS | 1,560.81 |
| AITC (तृणमूल) | 1,018.79 |
| कांग्रेस | 839.09 |
| CPI(M) | 782.52 |
| बीजद | 720.57 |
| बसपा | 666.30 |
| DMK* | 553.85 |
| समाजवादी पार्टी | 503.36 |
| तेदेपा | 476.66 |
*DMK का आंकड़ा FY 2023-24 का नवीनतम उपलब्ध डेटा है।
राष्ट्रीय दलों की आय में भाजपा का दबदबा
राष्ट्रीय दलों की कुल आय में भाजपा की हिस्सेदारी
(FY 2024-25)
85.03%
राष्ट्रीय दलों की कुल आय का हिस्सा
छह राष्ट्रीय दलों की कुल वास्तविक आय में भाजपा की हिस्सेदारी 85.03 प्रतिशत रही। अन्य पाँच राष्ट्रीय दलों की संयुक्त आय भी भाजपा की आय के बराबर नहीं पहुँच सकी।
| राष्ट्रीय दल | वास्तविक आय (₹ करोड़) |
|---|---|
| भाजपा | 6,769.15 |
| कांग्रेस | 918.29 |
| CPI(M) | 172.60 |
| बसपा | 58.59 |
| आप | 39.28 |
| NPP | 2.19 |
चुनावी प्रचार पर रिकॉर्ड खर्च
भाजपा ने वित्त वर्ष 2024-25 में कुल ₹6,769 करोड़ खर्च किए। इसमें से ₹3,335 करोड़ यानी लगभग 49 प्रतिशत राशि चुनाव और सामान्य प्रचार पर खर्च हुई। यह अकेला प्रचार व्यय देश की अधिकांश राजनीतिक पार्टियों की कुल वार्षिक आय से अधिक है।
रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि भाजपा को 5,522 बड़े दाताओं से योगदान मिला, जिनसे औसतन प्रति दाता लगभग ₹1.10 करोड़ प्राप्त हुए।
कांग्रेस चौथे स्थान पर
कांग्रेस की कुल संपत्ति ₹839.09 करोड़ रही, जबकि उसकी वास्तविक आय ₹918.29 करोड़ दर्ज की गई। दिलचस्प बात यह है कि संपत्ति के मामले में कांग्रेस से आगे BRS और तृणमूल कांग्रेस हैं।
वाम दल CPI(M) की संपत्ति ₹782.52 करोड़ और आय ₹172.60 करोड़ रही। वहीं बहुजन समाज पार्टी की संपत्ति ₹666.30 करोड़ दर्ज की गई, जो कई बड़े राष्ट्रीय दलों से अधिक है।
क्षेत्रीय दलों की ताकत
क्षेत्रीय दलों में BRS सबसे अमीर पार्टी बनकर उभरी। उसकी कुल संपत्ति ₹1,560.81 करोड़ है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस (₹1,018.79 करोड़), बीजद (₹720.57 करोड़), समाजवादी पार्टी (₹503.36 करोड़) और तेदेपा (₹476.66 करोड़) का स्थान है।
स्रोत : सत्यापित डेटा
यह आंकड़े निम्न आधिकारिक दस्तावेजों से लिए गए हैं :
- भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) में जमा वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट
- राजनीतिक दलों की आयकर विवरणियां (Income Tax Returns)
- एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा संकलित डेटा
- MyNeta पोर्टल पर उपलब्ध सत्यापित वित्तीय रिपोर्टें
- StoryRendered की 16 जून 2026 को प्रकाशित विस्तृत वित्तीय विश्लेषण रिपोर्ट
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारतीय राजनीति में आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ रही है। जब एक पार्टी के पास ₹12 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति हो और दूसरी ओर कई राष्ट्रीय दलों की आय ₹100 करोड़ से भी कम हो, तब चुनावी प्रतिस्पर्धा के स्वरूप पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोकतंत्र में विचार, संगठन और जनसमर्थन महत्वपूर्ण हैं, लेकिन 2024-25 के वित्तीय आंकड़े यह भी बता रहे हैं कि अब राजनीतिक शक्ति का सबसे बड़ा संकेतक धन बनता जा रहा है।
— राष्ट्रीय पंचायत अनुसंधान डेस्क
