
बिजनौर| तहसील बिजनौर के सभागार कक्ष में शनिवार को दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 को लेकर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का आयोजन माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रकीर्ण दाण्डिक अपील उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अजमल बेग में 20 अगस्त 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में किया गया। कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश संजय कुमार सप्तम के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव स्वाति चन्द्रा ने की, जबकि संचालन उपजिलाधिकारी स्मृति मिश्रा ने किया। शिविर में उपस्थित महिलाओं और पुरुषों को दहेज प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी गई।
सचिव स्वाति चन्द्रा ने बताया कि दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 का उद्देश्य दहेज के लेन-देन पर रोक लगाना और दहेज संबंधी अपराधों के लिए दंड का प्रावधान करना है। उन्होंने बताया कि कानून के तहत दहेज लेना, देना या दहेज के लिए उकसाना दंडनीय अपराध है।
उन्होंने बताया कि विवाह से पहले, विवाह के समय या विवाह के बाद प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से दी या मांगी जाने वाली संपत्ति अथवा मूल्यवान प्रतिभूति, कानून में निर्धारित परिस्थितियों के अनुसार दहेज की श्रेणी में आ सकती है। शिविर में दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में यह भी अपील की गई कि दहेज प्रतिषेध कानून का दुरुपयोग न हो और तथ्यहीन अथवा अनुचित मुकदमों से बचा जाए, ताकि वास्तविक मामलों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष लाया जा सके।
शिविर में नायब तहसीलदार विजय कुमार, पराविधिक स्वयंसेवक संजीव कुमार सहित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी उपस्थित रहे।

