

(पीड़ित – डॉ. दिग्विजय भाटी)
मेरठ। मेरठ में भारतीय किसान यूनियन (बीआर आंबेडकर) के अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी और संगठन से जुड़े मोहित जाटव के साथ कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। दोनों किसान नेताओं ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ समेत पुलिसकर्मियों पर एसएसपी कार्यालय और एसओजी कार्यालय में बेरहमी से पिटाई, थर्ड डिग्री देने, धमकी देने और फिल्मी गानों पर नचावाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चोटें स्कूटी से गिरने के कारण लगने की बात कही थी। अब पूरे प्रकरण की जांच सहारनपुर डीआईजी अभिषेक सिंह कर रहे हैं।
मीडिया के सामने रो पड़े किसान नेता
21 अगस्त को मेरठ के सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान के आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने अपने शरीर पर चोटों के निशान दिखाते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। दिग्विजय भाटी का दावा है कि 19 अगस्त को वह मोहित जाटव के साथ एसएसपी से मिलने पहुंचे थे। उनका कहना है कि ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़े विरोध-प्रदर्शन के मामले में अपना पक्ष रखने के लिए वे पुलिस कार्यालय गए थे। भाटी ने बताया कि पहले उन्हें और मोहित जाटव को एसएसपी दफ्तर में पीटा गया, उसके बाद सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ को बुलाया गया। भाटी ने बताया कि एसएसपी कार्यालय से सिविल लाइन थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ हम दोनों को एसओजी दफ्तर ले गए। वहां जाकर दोनों के एक-दूसरे के हाथ-पैर बंधकर बेरहमी से पिटाई की गई। प्रेस वार्ता में दिग्विजय का दावा है कि एसएसपी उनके एनकाउंटर की योजना बना चुके थे। एसएसपी ने पुलिसवालों से कहा था कि एक गोली मुझे मारो और फिर इनका एनकाउंटर कर दो। मैं सब देख लूंगा। हाथों की उंगलियों पर लाठी मारते रहे। कहते रहे कि इन हाथों से चार दिन भी रोटी नहीं खा पाओगे। उन्होंने बताया कि किसी तरह सरधना विधायक अतुल प्रधान हमें वहां से छुड़ाकर लाए।
दरोगा जी बने ‘सोले के गब्बर सिंह’ फिल्मी गानो पर नचवाया
किसान नेताओं का आरोप है कि पीटने के बाद कहा गया कि अब डांस करना है। फिर इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ ने मोबाइल पर खलनायक फिल्म का गाना- ‘चोली के पीछे क्या है’ बजाया और पहले भाटी को नचवाया। इसके बाद मोहित जाटव से कहा कि दोनों गाना गाओ और नाचो। मोहित ने बताया कि बुरी तरह पीटे जाने के बाद वह दोनों सिर्फ हाथ भर हिला पा रहे थे। कुछ देर बाद वह बोले कि उन्हें नींद की झपकी लग गई थी। अब दोबारा नाचो। वह उन पर सिर पर कपड़ा डालकर नाचने का भी दबाव बना रहे थे। इस बार छत पर सोया था बहनोई… फिल्मी गीत चलवाया और नाचने के लिए कहा।
पुलिस की स्कूटी फिसलने की कहानी गढ़ डाली
मामला सामने आने के बाद मेरठ पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स से दोनों नेताओं के आपराधिक इतिहास का उल्लेख करते हुए पुलिस पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया था। पुलिस के अनुसार, दोनों 19 अगस्त को सिविल लाइंस थाने में दर्ज मुकदमे के संबंध में बातचीत करने आए थे और वापस जाते समय स्कूटी फिसलने से घायल हुए। पुलिस ने यह भी बताया था कि इस संबंध में थाने की जीडी में लिखित प्रार्थना पत्र दर्ज है। दूसरी ओर, किसान नेताओं ने बाद में दावा किया कि उनसे दबाव में स्कूटी से गिरने संबंधी कागज पर हस्ताक्षर कराए गए थे। अब जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि उस लिखित प्रार्थना पत्र की परिस्थितियां क्या थीं और उसमें दर्ज घटना वास्तव में कैसे हुई।
आठ पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, नौ को नोटिस की तैयारी
इस मामले में नए मेरठ एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। इनमें दरोगा मुलायम सिंह, कांस्टेबल हरिओम, मुकेश कुमार, श्याम बाबू, सुमित कुमार, महिला कांस्टेबल नीलम लौर और चालक ललित कुमार शामिल हैं। वहीं जांच के दौरान तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय, इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ समेत नौ पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी किए जाने की तैयारी है।
एसएसपी के ट्रांसफर के बाद मामला उछला

(मेरठ के पूर्व एसएसपी-अभिनाश पांडे)
दिग्विजय भाटी और मोहित कुमार के साथ जिस दिन कथित मारपीट का प्रकरण हुआ उसी दिन बृहस्पतिवार देर शाम अन्य आईपीएस अधिकारियों के साथ एसएसपी अविनाश पांडेय का स्थानांतरित करके डीजीपी कार्यालय संबंद्ध कर दिया गया था। इसके बाद ही पिटाई व यातना देने के आरोप का मामला सुर्खियो में आया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
आईपीएस पांडेय मानसिक रूप से बीमार-अतुल प्रधान
मेरठ के सरधना विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि जो बर्बरता एसएसपी और सिविल लाइन इंस्पेक्टर ने की वह चिंताजनक है। सरकार को पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर मुकदमा दर्ज करना चाहिए। जिस तरह का कुकृत्य एक इतने बड़े पद पर बैठने के बाद एसएसपी ने किया, उससे साफ पता चलता है कि वह मानसिक रूप से बीमार हैं। सरकार को अविनाश पांडेय का स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए, ताकि भविष्य में वह स्वयं को भी गोली मारकर विभाग की छवि खराब न कर दे। अतुल प्रधान ने कहा कि इस पूरे कुकृत्य को अंजाम देने के बाद दिग्विजय और मोहित से जबरन लेटर लिखवाया गया। उसमें लिखा था कि उनका स्कूटी से एक्सीडेंट हुआ है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। एसएसपी के पास अगर इसका कोई साक्ष्य है, तो पेश करें। उनकी बर्बरता का सबूत उनके दफ्तर में लगे सीसीटीवी कैमरों में मौजूद है। सरकार को दोनों घटना स्थलों के वीडियो कैमरों की फुटेज निकलवानी चाहिए। इस मामले में पुलिस कार्य प्रणाली की पोल पट्टी खुल सके।

एडीजी-भानू भास्कर
एडीजी बोले- एसएसपी दफ्तर में हुआ था विवाद
एडीजी भानु भास्कर ने माना कि यह मामला एसएसपी दफ्तर में विवाद का है। किसान नेता एसएसपी से किसी मुद्दे पर वार्ता करने गए उनके कार्यालय गए थे। तब किसी मसले पर बात बिगड़ गई। सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने मेरठ पहुंच कर इस मामले की जांच शुरू कर दी है। वह इस घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रहे हैं।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव
किसान नेताओं के साथ मारपीट निंदनीय-अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि यह किसानो का अपमान, देश का अपमान है। भाजपा ने किसान के मुंह पर लात मरवाकर पूरे देश के किसानों को धमकाने का जो कुकृत्य किया है, वो क्षमा करने लायक नहीं है और निंदनीय है।

सांसद चन्द्रशेखर आजाद
वर्दी की ताकत का दुरुपयोग-चंद्रशेखर आजाद
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पुलिस हिरासत में कथित बर्बरता गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि यह पुलिसिंग नहीं, बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग है। उन्होंने पूरे प्रकरण में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई

