
नगीना /नजीबाबाद, संवाददाता, राष्ट्रीय पंचायत। दी बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया उत्तर प्रदेश पश्चिम के प्रदेश महासचिव राकेश मोहन भारती ने कहा कि, ‘दु:ख के अस्तित्व की स्वीकृति और दुःख के नाश करने का उपाय धम्म की आधारशिला है।’
श्री भारती ग्राम कलाखेड़ी नगीना स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास धर्मशाला के प्रांगण में रविवार को देर शाम दि बुद्धिस्ट सोसाइटी आफ इन्डिया शाखा जिला बिजनौर के तत्वावधान में आयोजित बौद्ध धर्म और विज्ञान विषय पर व्याख्यानमाला को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आरंभ भगवान बुद्ध एवं बोधिसत्व डॉ बाबासाहेब अंबेडकर जी के चित्रों के समक्ष दीप प्रचलित एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। इसके उपरांत कार्यक्रम में उपस्थित उपासक एवं उपासिकाओं को बौद्ध भत्ते रतन दीप जी के द्वारा त्रिशरण पंचशील ग्रहण कराया गया तथा बुद्ध धम्म संघ वंदना का पाठ सूत्र पठन किया गया।
बौद्ध धर्म और विज्ञान विषय पर विचार व्यक्त करते हुए श्री भारती ने कहा कि,’बुद्ध की दीक्षा के दो अर्थ हैं भिक्षु की दीक्षा जिसको सामूहिक रूप से संघ कहा जाता है। दूसरी उपासक की दीक्षा जो ग्रहस्थ हो, इसमें मुख्य रूप से चार प्रकार के भेद हैं। भिक्षु गृह त्यागी होता है। उपासक ग्रहस्थ है भिक्षु कोई संपत्ति नहीं रख सकता। ग्रहस्थ उपासक संपत्ति रख सकता है भिक्षु उपासक के जो नियम है भिक्षु के लिए वह व्रत है उनका पालन न करना दण्डनीय है, जबकि उपासक के लिए वह शील है जो अपनी सामर्थ्य के अनुसार अधिक अधिक से अधिक पालन करने प्रयास करता है। एक उपासक बनने के लिए किसी संस्कार की आवश्यकता नहीं, जबकि भिक्षु बनने के लिए उपसम्पदा संस्कार जरूरी है। बुद्ध के धम्म का केंद्र बिंदु आदमी है। आदमी और इस पृथ्वी पर रहते समय आदमी का आदमी के प्रति क्या कर्तव्य होना चाहिए उनकी पहली स्थापना है।’
उन्होंने कहा कि, ‘आदमी दुखी है कष्ट में है और दरिद्रता का जीवन व्यतीत कर रहे हैं। संसार दुःख से भरा पड़ा है और धम्म का उद्देश्य इस दु:ख का नाश करना ही है। इसके अतिरिक्त सधम्म और कुछ नहीं है।’ वक्ताओं की इस कड़ी में फौजी दिलीप कुमार बौद्ध, एडवोकेट समसपाल, बौद्धाचार्य सुभाष चंद्र आदि ने अपने विचार रखें। कार्यक्रम की अध्यक्षता फौजी दिलीप कुमार एवं संचालन सुमित कुमार ने किया।
इस मौके पर विवेक कुमार, हिमांशु कुमार, आदित्य कुमार, गोपाल, प्रेम सिंह, हरि सिंह, भूपेंद्र कुमार, राहुल कुमार, सहदेव कुमार, देवराज सिंह, टीकम सिंह, जयप्रकाश सिंह सहित अनेक उपासकों की उपस्थिति रही।