
बिजनौर। कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव पेहरुवाला में रामलीला मंचन के दौरान नृत्य बंद कराए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। मंगलवार को ग्रामीणों और रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई से बिजनौर में मुलाकात कर प्रार्थना पत्र सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि करीब दो साल पुराने वीडियो को एआई की मदद से एडिट कर वायरल किया गया, जिससे पुलिस को भ्रमित किया गया।
ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार रात कोतवाली देहात पुलिस गांव पहुंची और रामलीला मंचन के दौरान लोकनृत्य के रूप में प्रस्तुत किए जा रहे नृत्य को बंद करा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि रामलीला में महिलाओं के वेश में युवक नृत्य कर रहे थे, न कि नृतकियां। उन्होंने वायरल वीडियो को पुराना बताते हुए उसमें छेड़छाड़ किए जाने का दावा किया। और जांच की मांग की है।

पैसों की मांग पूरी न होने पर वीडियो वायरल करने का आरोप
ग्रामीणों ने कथित पत्रकारों पर पैसों की मांग पूरी नहीं होने के बाद वीडियो को एडिट कर वायरल करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों और वीडियो में एआई के इस्तेमाल की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कमेटी के पदाधिकारियों ने रामलीला का मंच उखाड़ दिया और मंचन आगे जारी रखने से इनकार कर दिया।
भाजपा के बहिष्कार का ऐलान
एसपी आफिस पर मीडिया से बात करते हुए रामलीला मंचन रोके जाने से नाराज ग्रामीणों ने यह भी ऐलान किया कि जब सरकार में हमारी कोई सुनवाई नहीं और भाजपा का कोई नेता हमारे साथ खड़ा नहीं हो सकता तो हम भी भारतीय जनता पार्टी का बहिष्कार करते हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने यह भी कहा कि हम किसी भी भाजपा नेता को अपने गांव में घुसने नहीं देंगे। ज्ञापन सौपने वालो में कमेटी अध्यक्ष खिलेंद्र सिंह, सुनील कुमार, रितुराज सिंह, राजीव कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
एसपी बोले-रामलीला मंचन पर रोक नहीं
पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई ने स्पष्ट किया कि रामलीला मंचन पर कोई रोक नहीं है। महिलाओं के नृत्य की वीडियो वायरल हुई थी, ऐसे में महिला नृत्य को मनाही की गई है। ग्रामीणों को रामलीला मंचन सुचारू रूप से करना चाहिए।” एसपी के बयान के अनुसार, रोक रामलीला मंचन पर नहीं, बल्कि महिला नृत्य पर लगाई गई है।




