

लखनऊ। राजधानी दिल्ल्ली में जंतर-मंतर पर सीजेपी आंदोलन व पूरे देश में जेन ज़ी के प्रदर्शनों के बाद अब देश के विभिन्न जगहो से जेन अल्फ़ा के अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। गत एक माह में यह पीढ़ी जगह-जगह प्रदर्शन करती दिखाई दी। वह भी केवल एक या दो राज्यों में नहीं, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जिनमें बच्चे अपनी समस्याओं को लेकर आवाज़ उठाते सुनाई और दिखाई दे रहे हैं। किसी की शिकायत शिक्षकों की कमी थी, तो किसी की स्कूलो में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, कोई मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल उठाता नज़र आया तो कोई स्कूल तक पहुंचाने वाली सड़क की खस्ता हालत के खि़लाफ़ बोलता। देश की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले सूबे उत्तर प्रदेश से भी ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। वहीं स्कूलो की समस्याओं को उजागर करने वाले लोगों पर सरकारी चाबूक भी जोर से चलाया जा रहा है उनके खिलाफ एफआईआर कराई जा रही है।
प्रदेश में कहां-कहां हुए प्रदर्शन
बीते 17 अगस्त को लखनऊ में तेज़ बारिश के बीच जयप्रकाश नारायण सर्वाेदय बालिका विद्यालय की करीब 250 छात्राएं स्कूल से लगभग ढाई किलोमीटर दूर दुबग्गा-कानपुर बाईपास तक पहुंच गईं। छात्राओं ने मानव श्रृंखला बनाई और सड़क पर बैठ गईं। उनकी सबसे बड़ी शिकायत शिक्षकों की कमी थी। उन्होंने बताया कि भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि बोर्ड परीक्षाएं नज़दीक हैं। राजधानी से इतर राज्य के दूसरे ज़िले और कस्बे से भी ऐसी कई तस्वीरें सामने आईं।
मसलन 28 जुलाई को फतेहपुर के किशनपुर स्थित सर्वाेदय इंटर कॉलेज में क़रीब एक हज़ार छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया। उनकी शिकायतों में जर्जर कक्षाएं, टपकती छत, पंखों की कमी, साफ़ पानी, फ़र्नीचर और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल थीं। प्रशासन के आश्वासन के बाद स्कूल में पंखे लगाए गए और आरओ के पानी की व्यवस्था की गई. स्कूल के प्रधानाचार्य लाल बहादुर सिंह ने भी कहा कि विद्यार्थियों की मांगों के मुताबिक टेबल, कुर्सी और पंखे लगाए गए हैं।
ंजिस स्कूल का मिड-डे मील वीडियो वायरल हुआ वहां के बच्चे क्या बोले?
11 अगस्त को हमीरपुर में चांदपुर और आसपास के गांवों के 200 से ज्यादा स्टूडेंट और करीब 50 अभिभावक लगभग पांच किलोमीटर की तिरंगा यात्रा करके कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनकी मांग स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की थी। बरसात में रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता था। प्रशासन के आश्वासन के बाद जाकर प्रदर्शन समाप्त हुआ। वहीं कन्नौज के अनौगी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में करीब सौ स्टूडेंट ने हॉस्टल के अंदर खुद को बंद कर भूख हड़ताल की। स्टूडेंट ने खाने की गुणवत्ता, पानी और हॉस्टल की व्यवस्था पर सवाल उठाए। स्कूल प्रबंधन के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और सारी व्यवस्था दुरुस्त की गई। 19 अगस्त को उन्नाव के मोहान स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वाेदय विद्यालय के 200 से ज्यादा छात्रो ने रास्ता जाम कर दिया। छात्रो ने शिक्षकों की कमी, ख़राब खाना, पीने के पानी और हॉस्टल की व्यवस्था को लेकर शिकायत की। कुछ स्टूडेंट ने शिक्षकों और दूसरे कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी आरोप लगाए। ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और स्टूडेंट के साथ खाना खाकर भोजन की गुणवत्ता को चेक किया।
22 अगस्त को कानपुर के घाटमपुर इलाके के भटपुरवा सामूही गांव में प्राथमिक स्कूल के बच्चे स्कूल के बाहर बैठ गए। उनकी मांग थी कि स्कूल की नई इमारत बनाई जाए। क्योंकि मौजूदा भवन का एक हिस्सा गिराए जाने के बाद स्कूल की सुविधा और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए थे।

बेसिक शिक्षा अधिकारी हापुड़ के आदेश की प्रति (फोटो)
स्कूल में बिना इजाज़त कंटेंट बनाने पर रोक
इन प्रदर्शनों और सामने आ रही स्कूलों की बदहाल तस्वीरों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने का एलान किया। आम लोगों से सरकारी स्कूलों की स्थिति दिखाने वाले वीडियो साझा करने की अपील की गई। आप ने भी उत्तर प्रदेश में इसी नाम से अभियान शुरू किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से स्कूलों की स्थिति रिकॉर्ड कर भेजने को कहा। पार्टी ने 55 सरकारी स्कूलों के वीडियो सामने रखने का दावा किया।
प्रशासन ने इसी बीच प्रदेश के कई ज़िलों में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, यूट्यूबर और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वालों के प्रवेश और वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर आदेश जारी कर दिए. कम से कम सात ज़िले-हापुड़, अयोध्या, बलरामपुर, आगरा, बलिया, बस्ती और आज़मगढ़ में बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने ऐसे आदेश जारी किए हैं।
सरकार का कहना है कि स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश और बच्चों की तस्वीरें या वीडियो बनाना ठीक नहीं है. प्रशासन का तर्क है कि इससे पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और बच्चों की निजता का भी सवाल है। लेकिन इसी दौरान स्कूलों की बदहाली दिखाने वाले कुछ वीडियो बनाने वालों पर एफ़आईआर भी दर्ज होने लगी।
हाथरस के कुलदीप यादव उन लोगों में हैं जिनकी इस मामले में गिरफ़्तारी की पुष्टि हुई है। उन्होंने सिकंदराराऊ के नावलि सिविलियन विद्यालय में कथित बदहाली दिखाते हुए वीडियो बनाया था। करीब चार मिनट के इस वीडियो में कुलदीप स्कूल परिसर में गोबर, खुले स्थान, शौचालय और दूसरी अव्यवस्थाएं दिखाते हैं। वह कहते हैं कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और वीडियो ज़िलाधिकारी, एसडीएम और दूसरे अधिकारियों तक पहुंचाया जाना चाहिए। वीडियो में स्कूल की प्रधानाचार्य भी अपनी तरफ से स्कूल की समस्याओं के बारे में बताती हैं। उनका कहना है कि एक कमरे में कई कक्षाएं चलानी पड़ती हैं और स्कूल की सड़क के पास होने के कारण बच्चों की सुरक्षा का भी ख़तरा है.
इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी विजय चौहान ने कुलदीप यादव के खि़लाफ़ कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई। उनका आरोप था कि कुलदीप ने जानबूझकर स्कूल के उस ख़राब हिस्से का वीडियो बनाया, जो पहले से ही उपयोग में नहीं था। वीडियो के माध्यम से भ्रामक तथ्यों को प्रस्तुत कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई। इस मामले पर कुलदीप यादव की मां सुनीता यादव वहां के स्थानीय पत्रकार चौधरी धर्मेंद्र सिंह से कहती हैं, ‘मेरे बेटे ने सिर्फ़ सरकारी स्कूल में गंदगी दिखाई थी, इसलिए उस पर एफ़आईआर कर दी गईं। उस स्कूल में एक ही कमरे में करीब 90 बच्चे पढ़ते हैं। शिक्षक और प्रधानाचार्य को भी इस पर ध्यान देना चाहिए था। मेरे बेटे की कोई ग़लती नहीं है.।
कुलदीप यादव को आईटी एक्ट की धारा 66(डी), जो कंप्यूटर या संचार उपकरण के ज़रिए किसी दूसरे शख्स का रूप धारण कर धोखाधड़ी से संबंधित है, और बीएनएस की धारा 229(2), जो न्यायिक कार्यवाही के अलावा झूठे साक्ष्य देने या गढ़ने से संबंधित है, के तहत गिरफ़्तार किया गया है।
ऐसी ही एक गिरफ़्तारी मेरठ में भी हुई है. मेरठ के सरधना थाने में सुरूरपुर के प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर क्षेत्र के उच्च प्रथामिक विद्यालय की छवि को कथित तौर पर धूमिल करने के आरोप में बीते 22 अगस्त को एफ़आईआर दर्ज करवाई थी। बीएनएस की धारा 353(2) और 356(2) के तहत मामला दर्ज हुआ और फिर इसके तहत दो लोगों की गिरफ़्तारी हुई। स्थानीय मीडिया ने दोनों ही लोगों की पहचान एडवोकेट संयम पांचाल और अयान मिर्ज़ा के तौर पर की है। दोनों ने अपने द्वारा बनाए एक वीडियो में दिखाया था कि सरधना के उच्च प्रथामिक विद्यालय के एक कमरे में बड़ी संख्या में सरकारी किताबें फ़्लोर पर फैली हुई थीं. इनमें से कई सीलन की वजह से ख़राब भी हो चुकी थीं।
वीडियो में स्कूल के बुनियादी ढांचे पर भी सवाल खड़े किए गए थे जिसके बाद शिक्षा विभाग ने इस वीडियो को भ्रामक बताते हुए एफ़आईआर दर्ज करवाई और मामले में गिरफ़्तारी हुई। हालांकि 24 घंटे के भीतर दोनों ज़मानत पर रिहा हो गए।
प्रदेश में नोएडा से देवरिया तक मामले

बेसिक शिक्षा अधिकारी अयोध्या के आदेश की प्रति (फोटो)
नोएडा में आम आदमी पार्टी की उत्तर प्रदेश युवा विंग के अध्यक्ष पंकज अवाना के खि़लाफ़ सेक्टर-51 के होशियारपुर गांव स्थित सरकारी स्कूल में बिना अनुमति प्रवेश कर वीडियो बनाने के आरोप में एफ़आईआर हुई। अवाना के क़रीब दो मिनट के वीडियो में स्कूल परिसर की गंदगी, शौचालय और ज़मीन की स्थिति दिखाई गई है. वह सवाल उठाते हैं कि अगर सरकार स्कूलों के कायाकल्प का दावा करती है तो ज़मीन पर स्थिति ऐसी क्यों है।
स्कूल स्टाफ़ की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसमें बीएनएस की धारा 333 लगाई गई है, जो किसी व्यक्ति को डराने या दबाव डालकर सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने से संबंधित है। इसके अलावा धारा 351(2) आपराधिक धमकी, धारा 352 जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने की कोशिश और धारा 3(5) एक ही आपराधिक कृत्य में कई लोगों की साझा ज़िम्मेदारी से संबंधित है। अवाना का कहना है कि वह स्कूलों की हालत दिखाना बंद नहीं करेंगे।
ग्रेटर नोएडा में भी बादलपुर थाना क्षेत्र के गुरिधरपुर सुनारसी स्थित माध्यमिक विद्यालय में क़रीब आठ अज्ञात लोगों के बिना अनुमति पहुंचकर वीडियो बनाने के आरोप में एफ़आईआर दर्ज हुई है। पुलिस इन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
देवरिया में युवा कार्यकर्ता रजत सिंह के खिलाफ़ गौरीबाज़ार थाने में एफ़आईआर दर्ज हुई. उन्होंने 16 अगस्त को डमर बिस्वा गांव के प्राथमिक स्कूल का वीडियो बनाया था, जिसमें स्कूल परिसर में मलबा, कचरा और जर्जर हिस्से दिखाई दे रहे थे।
पुलिस की शिकायत में कहा गया कि यह मलबा पहले ही अनुपयोगी घोषित किए गए भवन को गिराए जाने के बाद पड़ा था और उसे हटाने की प्रक्रिया चल रही थी। वीडियो को ग़लत और भ्रामक बताकर बीएनएस की धारा 329(4) और 353(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 329(4) किसी भवन या संपत्ति में अनाधिकृत प्रवेश या वहां बने रहने से जुड़ी है, जबकि धारा 353(2) ऐसी झूठी जानकारी या अफ़वाह फैलाने से संबंधित है जिससे किसी समुदाय या समूह के बीच वैमनस्य या शत्रुता पैदा होने की आशंका हो।
रजत सिंह का कहना है कि अगर स्कूल में मलबा था और कैमरे ने उसे दिखाया तो इसमें ग़लत क्या है। उनका सवाल है कि किसी सरकारी स्कूल की ख़राब हालत दिखाने से पहले क्या नागरिकों को सरकार की योजनाओं की पूरी सूची भी बतानी होगी?
रजत सिंह के मुताबिक़, स्कूल परिसर की बाउंड्री वॉल टूटी हुई थी इसलिए प्रवेश करने के लिए किसी अनुमति की ज़रूरत नहीं है. परिसर में ही पंचायत भवन भी है।
अमेठी में भी स्कूल की बदहाली से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद अज्ञात व्यक्ति के खि़लाफ़ मामला दर्ज हुआ है. पुलिस के मुताबिक़ वीडियो आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर मिला था और उसी के आधार पर शिकायत दर्ज करवाई गई है।
स्थानीय मीडिया में छपी खबर के मुताबिक़ यह शिकायत स्कूल की प्रधानाध्यापिक नायला की तहरीर पर अमेठी के इन्हौना थाने में दर्ज की गई है। इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी), जो कंप्यूटर या संचार उपकरण का इस्तेमाल कर किसी दूसरे व्यक्ति का रूप धरकर धोखाधड़ी करने से संबंधित है, और बीएनएस की धारा 353 लगाई गई है।
पुलिस के अनुसार, स्कूल की वीडियो बनाने वाला कौन था, इसकी पहचान अभी नहीं हो सकी है। सीसीटीवी के ज़रिए उसकी पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
एक मामला कन्नौज का भी है. कन्नौज के गुगरापुर स्थित पीएम श्री उत्तर प्रदेश कंपोजिट स्कूल में बीते 20 अगस्त को विद्यार्थियों ने पढ़ाई का बहिष्कार कर प्रधानाचार्य के खि़लाफ़ प्रदर्शन किया था।
विद्यार्थियों और अभिभावकों ने प्रधानाचार्य पर बदसलूकी, भेदभाव और यहां तक कि मारपीट के आरोप भी लगाए थे। विद्यार्थियों की शिकायत थी कि लंबे समय से गणित का नियमित शिक्षक नहीं है और विज्ञान के शिक्षक से गणित पढ़ाया जा रहा है। प्रदर्शन का वीडियो भी सामने आया था।
अब इस मामले में, प्रशासन का दावा है कि कुछ अज्ञात लोगों ने बच्चों को बिस्किट देकर प्रदर्शन के लिए उकसाया और सरकार एवं शिक्षा विभाग की छवि ख़राब करने की कोशिश की। इसी आरोप में 22 अगस्त को अज्ञात लोगों के खि़लाफ़ बीएनएस की धारा 189(2), 49, 54 और 57 के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है।
उधर रामपुर में बच्चों के नदी पार कर स्कूल जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला दर्ज हुआ है। प्रशासन का दावा है कि वीडियो भ्रामक है क्योंकि स्कूल जाने के लिए दूसरा रास्ता भी उपलब्ध था। इसके बावजूद वीडियो में दिखाया गया कि बच्चे नदी से गुज़रते हुए स्कूल जाने पर मजबूर हैं।
स्थानीय पत्रकार मुजस्सिम ख़ान की मदद से मिली एफ़आईआर की कॉपी बताती है कि बीएनएस की धारा 125 और 353 के तहत पांच लोगों और एक अज्ञात शख्स के खि़लाफ़ मामला दर्ज किया गया है. ये पांच लोग हैं – गौतम, शिवम, नूर हसन, शमीम उल हसन, सुनील कुमार।
वहीं मथुरा के स्थानीय पत्रकार सुरेश सैनी ने बताया कि रवि कुमार नाम के एक शख्स के खि़लाफ़ भी एफ़आईआर की तहरीर दी गई है।
रवि ने अपने फ़ेसबुक पर एक वीडियो साझा किया था जिसमें दिखाया गया था कि विकास खंड फरह की ग्राम पंचायत शाहपुर फरह के मजरा में जलभराव है और प्राथमिक स्कूल के बच्चे इसी से होकर गुज़रने को मजबूर हैं. ज़िला पंचायत अधिकारी धनंजय जायसवाल ने आरोप लगाया है कि यह वीडियो भ्रामक है और ज़िला पंचायत की छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई है।
रवि से बात की. रवि ने कहा, ‘हमने कोई भ्रामक वीडियो नहीं बनाया. पूरे गांव के लोग इस हक़ीक़त को जानते हैं कि स्कूल के रास्ते में जलभराव था और बच्चे वहां से गुज़रने को मजबूर होते हैं।’
सरकार क्या कह रही है?
सीएम योगी ने कथित ‘भ्रामक वीडियो’ बनाने वालों के खि़लाफ़ एफ़आईआर समेत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 अगस्त की अधिकारियों के साथ बैठक में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को लेकर शेयर हो रहे कथित ‘भ्रामक वीडियो’ पर नाराज़गी जताई। उन्होंने ऐसे लोगों के खि़लाफ़ एफ़आईआर समेत कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को स्कूलों में जाकर मिड-डे मील, शौचालय और कक्षाओं की स्थिति की जांच करने और ज़िलाधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने का आदेश दिया।
प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने भी कहा कि कुछ लोग सिर्फ़ नकारात्मकता तलाशकर विभाग में काम कर रहे लोगों का मनोबल गिराने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि 2017 से पहले बेसिक शिक्षा विभाग बदहाल था और बीजेपी सरकार के बाद इसमें बड़े सुधार हुए हैं।
सरकार ने दूसरी तरफ क़रीब 40 हज़ार बेसिक और माध्यमिक स्कूलों के लिए 14 बिंदुओं की जांच सूची भी जारी की है, जिसमें पानी, शौचालय, बिजली, साफ-सफाई, भोजन और सुरक्षा जैसी सुविधाओं की जांच शामिल है। विपक्ष का कहना है कि सरकार एक तरफ स्कूलों की शिकायतों की जांच और सुविधाएं सुधारने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उन लोगों पर क़ानूनी कार्रवाई हो रही है जो इन्हीं स्कूलों की तस्वीरें सार्वजनिक कर रहे हैं।
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा है कि सरकार एफ़आईआर के ज़रिए डर पैदा करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लोग नहीं डरने वाले, वो स्कूल की बदहाली की तस्वीरें दुनिया के सामने लाते रहेंगे।
वहीं दूसरी ओर जिस प्रकार से सरकार स्कूलो की बदहाली बच्चो की तकलीफो का वीडियो सोसल मीडिया पर डालने वालो पर एफआईआर और गिरफ्तारी की कार्यवाही कर रही है । इससे तो कबीर दास जी के प्रसिद्ध दोहे ‘निंदक नियरे राखिये’ के बजाये इस पूरे मामले पर सरकार की नीति ‘निंदक दूर राखिये’ वाली ही लगती है।

