

काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने तबाही का ऐसा मंजर पैदा किया है, जिसकी भयावहता पांच दिन बाद भी सामने आ रही है। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 734 शव और मानव अवशेष बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,498 लोग अब भी लापता हैं। सरकार के मुताबिक लापता लोगों में स्थानीय नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारी, विदेशी नागरिक और पर्यटक भी शामिल हैं।
19 हजार सुरक्षाकर्मी, हेलीकॉप्टरों से जारी अभियान
नेपाल सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान में लगभग 19 हजार सुरक्षाकर्मियों को लगाया है। सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी, निकासी और राहत कार्य में जुटी हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 8,186 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों और विशेष बचाव दलों की मदद ली जा रही है।
भोटेकोशी फिर बढ़ी, बचाव अभियान पर भी खतरा
आपदा के बीच रविवार को भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया, जिसके बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में तैनात राहत और बचाव दलों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इसका अर्थ यह है कि बचावकर्मी एक तरफ मलबे और नदी किनारे लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें अचानक आने वाली दूसरी बाढ़ और भूस्खलन के खतरे से भी जूझना पड़ रहा है।
तबाही केवल नदी तक सीमित नहीं
भोटेकोशी और उससे जुड़े नदी तंत्र में आई बाढ़ ने सड़कों, पुलों, मकानों और जलविद्युत परियोजनाओं सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था बाधित होने से राहत सामग्री और बचाव दलों को पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी आपदा के बाद बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के नुकसान और लगातार जारी खोज-बचाव अभियान की पुष्टि की है।

आंकड़ों में छिपी त्रासदी की असली तस्वीर
लापता लोगों की संख्या इस आपदा को सामान्य बाढ़ से कहीं अधिक गंभीर बनाती है। सरकारी विवरण के अनुसार लापता लोगों में 933 जलविद्युत परियोजना कर्मी और 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा रसुवा, नुवाकोट और आसपास के जिलों के स्थानीय नागरिक भी बड़ी संख्या में लापता हैं। यही कारण है कि बरामद शवों की संख्या और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार बदल रहा है।
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता आपदा जोखिम
नेपाल की मौजूदा त्रासदी केवल एक आकस्मिक बाढ़ नहीं है। हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा, भूस्खलन, हिमनद और बर्फ-पत्थर के अचानक खिसकने जैसी घटनाएं नदी घाटियों में कुछ ही समय में विनाशकारी बाढ़ पैदा कर सकती हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि हिमालयी देशों में जलवायु परिवर्तन, तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन की तैयारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
नेपाल सरकार ने हालांकि इस आपदा के कारणों की अंतिम पुष्टि अभी नहीं की है और आधिकारिक तौर पर कहा है कि घटना की प्रकृति की पूरी जांच जारी है। इसलिए इसे किसी एक कारण से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी।
भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ भी बचाव में
आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल को अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मिल रहा है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के सुरंग बचाव विशेषज्ञों को विशेष रूप से उन लोगों को निकालने के लिए लगाया गया है, जो जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे हो सकते हैं।

