

नई दिल्ली, 11 सितंबर। भारत की मेजबानी में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल होंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शी जिनपिंग भारत दौरे पर आ रहे हैं। उनके दौरे को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।ब्रिक्स सम्मेलन को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, तुगलक रोड इलाके में करीब 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं, पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक आयोजन स्थल और उसके आसपास कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था की गई है।एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, सम्मेलन के दौरान दिल्ली में करीब 15 हजार पुलिसकर्मियों तथा अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियों को तैनात किया जाएगा। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, सरकार के प्रमुखों, मंत्रियों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था इस तरह की गई है कि आम लोगों को कम से कम असुविधा हो।भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। इस वर्ष मई में भारत ने ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की भी मेजबानी की थी।
ब्रिक्स का बढ़ा दायरा
ब्रिक्स मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत और चीन का समूह था। वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम ब्रिक्स हुआ। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इसके सदस्य बने, जबकि इंडोनेशिया 2025 में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ।
वर्तमान में ब्रिक्स में 11 पूर्ण सदस्य हैं। इसके अलावा कई देशों को साझेदार देश का दर्जा दिया गया है। समूह का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और विकास संबंधी सहयोग को बढ़ावा देना है।
ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ रहा है, हालांकि सदस्य देशों के बीच विभिन्न राजनीतिक मतभेद भी मौजूद हैं। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद इनमें प्रमुख है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है, दिल्ली में होने वाले इस शिखर सम्मेलन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

