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यूपीआई भुगतान पर किसे देना होगा शुल्क? आम यूजर के लिए क्या बदला

₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर शुल्क नहीं, कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एमडीआर ग्राहक से अलग शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं

नई दिल्ली, 16 सितंबर। यूपीआई भुगतान को लेकर शुल्क की चर्चा के बीच सरकार के नए ढांचे में आम उपभोक्ताओं के लिए राहत बरकरार रखी गई है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं होगा। वहीं ₹2,000 तक के पात्र व्यक्ति-से-व्यापारी यानी P2M भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा।

आम व्यक्ति से यूपीआई भेजने पर शुल्क नहीं

एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को यूपीआई से कितनी भी राशि भेजता है, उस पर अलग से ट्रांजैक्शन या प्लेटफॉर्म शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यूपीआई की मूल सेवा बैंक खातों के बीच तत्काल भुगतान की सुविधा देती है।

₹2,000 तक दुकानदार को भुगतान भी मुफ्त

किराना दुकान, रेस्तरां, पेट्रोल पंप या अन्य पात्र व्यापारी को ₹2,000 तक का यूपीआई भुगतान करने पर ग्राहक से कोई अलग शुल्क नहीं लिया जाएगा।

₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतान पर MDR

सरकार के बताए नए ढांचे के अनुसार, निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के P2M लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन बताई गई है। उदाहरण के लिए पात्र ₹10,000 के भुगतान पर MDR ₹40 होगा।

यह ग्राहक से अलग से वसूला जाने वाला यूपीआई शुल्क नहीं है। MDR भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच लागत/राजस्व व्यवस्था का हिस्सा है।

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए ₹5 का फ्लैट MDR

रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसी निर्धारित श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के पात्र भुगतान पर प्रतिशत आधारित MDR के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किए जाने की बात कही गई है।

शेयर और म्यूचुअल फंड भुगतान

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े पात्र भुगतान के लिए 0.02 प्रतिशत MDR, अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन, प्रस्तावित ढांचे में बताया गया है।

छोटे कारोबारियों को राहत

निर्धारित P2PM श्रेणी में आने वाले छोटे कारोबारी, जिनकी यूपीआई प्राप्तियां तय सीमा के भीतर हैं, शून्य-MDR व्यवस्था में रहेंगे। इससे छोटे दुकानदारों पर नए शुल्क ढांचे का प्रभाव सीमित रखने का उद्देश्य है।

कोई मासिक ‘फ्री यूपीआई लिमिट’ नहीं

आम यूजर के लिए यूपीआई भुगतान की कोई मासिक मुफ्त ट्रांजैक्शन सीमा तय किए जाने की बात नहीं है। हालांकि बैंक अपनी सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन नीतियों के अनुसार दैनिक लेन-देन सीमा निर्धारित कर सकते हैं।

कितना यूपीआई कारोबार प्रभावित होगा?

सरकार के अनुसार नए MDR का दायरा मर्चेंट लेन-देन के छोटे हिस्से तक सीमित रहेगा। उपलब्ध NPCI आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में यूपीआई पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450.9 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य करीब ₹29.82 लाख करोड़ रहा।

सबसे जरूरी बातें

P2P भुगतान: मुफ्त
₹2,000 तक P2M: MDR नहीं
कुछ ₹2,000 से अधिक P2M: 0.4% MDR, अधिकतम ₹300
निर्धारित आवश्यक सेवाएं: ₹5 फ्लैट MDR
सिक्योरिटीज/म्यूचुअल फंड श्रेणी: 0.02%, अधिकतम ₹300
ग्राहक से अलग MDR वसूली: व्यवस्था के अनुसार नहीं
मासिक मुफ्त यूपीआई कोटा: नहीं

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