

मेरठ, 17 सितंबर। मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट और गुरुद्वारा रोड क्षेत्र में बुधवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में छह सील भवनों को ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आवास एवं विकास परिषद की ओर से की गई। कार्रवाई के दौरान भवनों में संचालित कारोबार से जुड़े लोगों और स्थानीय निवासियों में आक्रोश तथा भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोग ध्वस्तीकरण के दौरान रोते बिलखते दिखाई दिए।
आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों के अनुसार, ध्वस्त की गई छह संपत्तियां आवासीय भूखंडों पर बनी थीं और इनके नक्शे स्वीकृत नहीं थे। इन संपत्तियों में आवासीय उपयोग के स्थान पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। छह भवनों में एक बैंक्वेट हॉल और पांच व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स शामिल थे। इन कॉम्प्लेक्स में करीब 35 दुकानें संचालित होने की जानकारी सामने आई है।
सुबह से बैरिकेडिंग, भारी पुलिस बल तैनात
ध्वस्तीकरण से पहले बुधवार सुबह करीब छह बजे क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। सेंट्रल मार्केट और आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई तथा आम आवाजाही प्रतिबंधित रही। इससे स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और स्थानीय निवासियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली आपूर्ति भी कुछ समय के लिए बंद किए जाने की सूचना है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुबह करीब 7ः15 बजे शुरू हुई और दोपहर तक चली।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई
आवास एवं विकास परिषद के अनुसार, सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सील किया गया था। इन संपत्तियों में आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने का मामला सामने आया था।
14 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सील की गई 44 संपत्तियों के अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद परिषद ने संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस देकर निर्धारित अवधि में अवैध निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए थे। अवधि पूरी होने के बाद परिषद ने बुधवार को छह संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
छह भवनों का नक्शा स्वीकृत नहीं था
उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह के अनुसार, सील की गई 44 संपत्तियों में से छह ऐसी थीं, जिनका नक्शा स्वीकृत नहीं था। परिषद के मुताबिक इन्हीं छह संपत्तियों को बुधवार को ध्वस्त किया गया। परिषद का कहना है कि इन भवनों का निर्माण आवासीय भूखंडों पर बिना स्वीकृत नक्शे के किया गया था।

कारोबारियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी
कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारियों ने विरोध भी किया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद व्यापारियों से बातचीत की और उन्हें बताया कि फिलहाल छह चिन्हित संपत्तियों पर ही कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद ध्वस्तीकरण शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान कुछ महिला-पुरूषं को रोते हुए देखा गया।
स्थानीय कारोबारियों की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि यदि निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से चल रही थीं तो संबंधित विभागों ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की। कुछ लोगों ने अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की।
दशकों से चल रही है विवाद की प्रक्रिया
सेंट्रल मार्केट में आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग का विवाद नया नहीं है। उपलब्ध न्यायिक घटनाक्रम के अनुसार, वर्ष 2024 से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से संबंधित कार्रवाई आगे बढ़ी। 2025 में एक कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त किया गया था। इसके बाद जनवरी 2026 में अदालत ने शेष अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। अप्रैल 2026 में 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश दिया गया और 14 जुलाई 2026 को इन सील संपत्तियों के अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया।
शास्त्रीनगर योजना में आवासीय और व्यावसायिक भूखंड
आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर योजना में आवासीय और व्यावसायिक दोनों प्रकार के भूखंड हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार योजना के विभिन्न सेक्टरों में कुल 230 व्यावसायिक भूखंड निर्धारित हैं। इनमें सेक्टर-2 में 47, सेक्टर-3 में 15, सेक्टर-6 में 48, सेक्टर-9 में सात, सेक्टर-12 में 30 और सेक्टर-13 में 83 व्यावसायिक भूखंड शामिल हैं।
इसके बावजूद कई आवासीय संपत्तियों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने का मामला सामने आया है। आवास विकास परिषद की कार्रवाई का मुख्य आधार आवासीय भूखंडों के स्वीकृत उपयोग और मौके पर किए जा रहे व्यावसायिक उपयोग के बीच अंतर तथा निर्माण नियमों का उल्लंघन बताया गया है।

21 सितंबर को कार्यवाही रिपोर्ट पेश होगी सुप्रीम कोर्ट में
बुधवार की कार्रवाई के बाद आवास एवं विकास परिषद ने छह ध्वस्त संपत्तियों से संबंधित अनुपालन रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परिषद के अधिकारियों के अनुसार, 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
