राष्ट्रीय पंचायत विशेष रिपोर्ट-
नई दिल्ली। डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों की नई पीढ़ी के सामने रोजगार के पारंपरिक विकल्पों के साथ-साथ अपना व्यवसाय खड़ा करने के नए अवसर भी सामने आ रहे हैं। अब छोटे उत्पादक, कारीगर, किसान उत्पादक संगठन, मिल संचालक, दुकानदार और MSME उद्यमी अपने उत्पादों को डिजिटल माध्यम से देश के बड़े बाजार तक पहुंचा सकते हैं।
इसी दिशा में DigiReady Certification (DRC) और Open Network for Digital Commerce (ONDC) को महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। DRC, Quality Council of India (QCI) और ONDC की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य किसी कारोबारी इकाई की ऑनलाइन कारोबार करने की डिजिटल तैयारी का आकलन करना है।
DRC क्या है और छोटे कारोबारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
DigiReady Certification छोटे कारोबारियों और MSME इकाइयों को यह समझने में मदद करता है कि वे डिजिटल माध्यम से अपना कारोबार संचालित करने के लिए कितने तैयार हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मूल्यांकन सात प्रमुख मॉड्यूल पर आधारित है—प्री-रिक्विजिट, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोडक्ट कैटलॉग, कैटलॉग मैनेजमेंट, पैकेजिंग, पेमेंट और शिकायत निवारण।
मूल्यांकन में महत्वपूर्ण प्रश्नों को सही ढंग से पूरा करने पर इकाई को DigiReady के रूप में प्रमाणित किया जाता है। यदि किसी मॉड्यूल में कमी रह जाती है तो संबंधित डिजिटल कौशल को विकसित करने के लिए वीडियो आधारित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है।
ONDC पर एक बार पंजीकरण, कई Buyer Apps तक पहुंच
ONDC स्वयं कोई पारंपरिक Amazon या Flipkart जैसा बंद Marketplace नहीं है। यह एक open, interoperable digital commerce network है, जिसमें अलग-अलग Buyer Apps, Seller Apps और अन्य Network Participants मिलकर डिजिटल कारोबार का नेटवर्क तैयार करते हैं। ONDC की आधिकारिक जानकारी के अनुसार कोई विक्रेता Seller Network Participant के माध्यम से नेटवर्क पर जुड़ सकता है और उसके उत्पाद विभिन्न Buyer Applications पर दिखाई दे सकते हैं।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ छोटे कारोबारियों को मिल सकता है। उदाहरण के लिए किसी जिले की आटा चक्की, मसाला निर्माता, बेसन मिल, नमकीन निर्माता, हस्तशिल्प इकाई या कपड़ा व्यवसाय अपने उत्पादों को डिजिटल कैटलॉग के माध्यम से व्यापक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
SC-ST युवाओं के लिए उद्यमिता का नया रास्ता
SC-ST वर्ग के युवाओं के लिए इसका महत्व केवल ऑनलाइन बिक्री तक सीमित नहीं है। यदि किसी युवा के पास कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, कपड़ा, घरेलू उत्पाद अथवा स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया कोई विशिष्ट उत्पाद है, तो वह डिजिटल माध्यम से अपने ब्रांड, पैकेजिंग और ग्राहक आधार को विकसित कर सकता है।
इससे रोजगार की सोच में भी बदलाव आ सकता है। बड़ी डिग्री हासिल करने के बाद केवल सरकारी या निजी नौकरी की तलाश करने के बजाय युवा उत्पादक, विक्रेता और ब्रांड मालिक बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट रहना चाहिए कि DRC या ONDC से जुड़ना अपने आप में लाखों रुपये की मासिक आय की गारंटी नहीं देता। आय उत्पाद की गुणवत्ता, कीमत, मांग, ग्राहक सेवा, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और कारोबार के संचालन पर निर्भर करेगी।
गांव और छोटे शहरों के उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार
ONDC का मॉडल छोटे और स्थानीय कारोबारियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका उद्देश्य डिजिटल कॉमर्स में अधिक से अधिक प्रकार के विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं को शामिल करना है। ONDC की Seller जानकारी के अनुसार ऑफलाइन व्यवसाय भी नेटवर्क के माध्यम से ऑनलाइन पहुंच विकसित कर सकते हैं और अपने उत्पादों को विभिन्न Buyer Applications के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं।
इससे नजीबाबाद, बिजनौर, मुरादाबाद, मेरठ, पटना, गया, लखनऊ जैसे शहरों के स्थानीय उत्पादों को दूसरे शहरों के ग्राहकों तक पहुंचाने के अवसर बढ़ सकते हैं।
कैसे काम करता है ONDC का नेटवर्क?
मान लीजिए किसी छोटे उद्यमी के पास अपनी दाल, बेसन, मसाले या अन्य खाद्य उत्पाद की इकाई है। वह किसी उपयुक्त Seller Network Participant के माध्यम से अपने उत्पाद का डिजिटल कैटलॉग तैयार करता है। इसमें उत्पाद का नाम, फोटो, कीमत, वजन, उपलब्ध स्टॉक और अन्य आवश्यक जानकारी शामिल की जाती है।
ग्राहक दूसरी ओर किसी Buyer Application के माध्यम से उत्पाद खोजता है। नेटवर्क की इंटरऑपरेबिलिटी के कारण अलग-अलग ऐप और नेटवर्क प्रतिभागियों के बीच डिजिटल लेन-देन संभव होता है। ONDC के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार नेटवर्क पर Seller Network Participants विक्रेताओं को ऑनबोर्डिंग और कारोबार संचालन में सहायता प्रदान करते हैं।
सात डिजिटल कौशल बन सकते हैं कारोबार की ताकत
DigiReady के सात मॉड्यूल छोटे कारोबारी को डिजिटल कारोबार की बुनियादी समझ विकसित करने में मदद करते हैं।
पहला—प्री-रिक्विजिट: कारोबार से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और पात्रताएं।
दूसरा—डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: स्मार्टफोन, इंटरनेट और आवश्यक डिजिटल साधनों का उपयोग।
तीसरा—प्रोडक्ट कैटलॉग: उत्पाद की फोटो, कीमत, वजन और अन्य जानकारी सही ढंग से प्रस्तुत करना।
चौथा—कैटलॉग मैनेजमेंट: स्टॉक और उत्पाद की उपलब्धता को अपडेट रखना।
पांचवां—पैकेजिंग: ग्राहक तक उत्पाद सुरक्षित पहुंचाने के लिए उचित पैकिंग।
छठा—पेमेंट: डिजिटल भुगतान और बैंकिंग प्रक्रिया की समझ।
सातवां—ग्रिवांस रिड्रेसल: ग्राहक की शिकायत, रिटर्न और संबंधित समस्याओं का समाधान।
इन सात क्षेत्रों की जानकारी छोटे कारोबार को केवल ONDC के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापक डिजिटल बाजार के लिए भी तैयार कर सकती है।
DRC के बाद क्या लाभ मिल सकता है?
QCI और ONDC के अनुसार DigiReady प्रमाणन से प्रमाणित विक्रेता की विश्वसनीयता बढ़ाने और डिजिटल कारोबार के अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है। प्रमाणित विक्रेताओं की संपर्क जानकारी वाली सूची, उनकी सहमति के बाद, Seller Network Participants को उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे Network Participants को उपयुक्त विक्रेताओं की पहचान और ऑनबोर्डिंग में सुविधा होती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर प्रमाणित व्यक्ति को निश्चित रूप से किसी विशेष ऐप से फोन आएगा या उसे स्वतः बिक्री मिलने लगेगी। कारोबारी को अपने उत्पाद, कीमत, गुणवत्ता, ग्राहक सेवा और मार्केटिंग पर भी लगातार काम करना होगा।
‘अपना ब्रांड, अपना कारोबार’ की ओर बढ़ने का अवसर
SC-ST समाज के युवाओं के लिए डिजिटल कॉमर्स का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे केवल नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।
एक युवा यदि मसाला, आटा, बेसन, दाल, अचार, नमकीन, कपड़ा, हस्तशिल्प अथवा अन्य स्थानीय उत्पाद तैयार करता है, तो वह उत्पाद को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय डिजिटल माध्यम से नए ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर सकता है।
यही सोच ‘डिग्री के साथ उद्यमिता’ और ‘नौकरी के साथ अपना कारोबार’ की नई संस्कृति को जन्म दे सकती है।
ONDC को समझना क्यों जरूरी?
ONDC की अवधारणा का मूल उद्देश्य डिजिटल कॉमर्स को अधिक खुला और इंटरऑपरेबल बनाना है। आधिकारिक ONDC पोर्टल इसे ऐसे नेटवर्क के रूप में प्रस्तुत करता है जिसमें विभिन्न प्रकार के Buyer, Seller, Technology और अन्य Network Participants मिलकर काम करते हैं।
इसलिए किसी छोटे कारोबारी के लिए ONDC का महत्व केवल एक और ऑनलाइन बिक्री चैनल के रूप में नहीं, बल्कि डिजिटल बाजार में प्रवेश के एक वैकल्पिक नेटवर्क के रूप में समझा जाना चाहिए।
दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की पहल
SC-ST समाज के युवाओं और उद्यमियों को डिजिटल कारोबार की संभावनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन जैसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे मंच युवाओं को डिजिटल कैटलॉग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, ऑनलाइन भुगतान, ई-कॉमर्स और सरकारी डिजिटल पहलों की जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकते हैं।
डॉ. जितेन्द्र पासवान के अनुसार, SC-ST समाज की नई पीढ़ी को पारंपरिक रोजगार की सीमाओं से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक, डिजिटल बाजार और उद्यमिता को अपनाने की जरूरत है। लक्ष्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने उत्पाद और ब्रांड के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करना होना चाहिए।
डिजिटल बाजार में भागीदारी ही अगली आर्थिक शक्ति
DigiReady Certification और ONDC छोटे कारोबारियों को डिजिटल कॉमर्स की दुनिया से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। DRC डिजिटल तैयारी का आकलन करता है, जबकि ONDC विभिन्न नेटवर्क प्रतिभागियों के माध्यम से डिजिटल कॉमर्स के लिए खुला नेटवर्क उपलब्ध कराता है।
SC-ST समाज की नई पीढ़ी यदि शिक्षा + कौशल + डिजिटल तकनीक + उत्पाद निर्माण + ब्रांडिंग को एक साथ अपनाती है, तो वह रोजगार की तलाश करने के साथ-साथ रोजगार पैदा करने वाली पीढ़ी भी बन सकती है।
संदेश स्पष्ट है—अपना उत्पाद बनाइए, अपना ब्रांड तैयार कीजिए, डिजिटल बाजार को समझिए और देशभर के ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश कीजिए।


