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भीमा कोरेगांव: संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय की अमर कथा

डॉ. आंबेडकर के विचारों से जुड़कर यह स्थल बना सामाजिक जागरण का केंद्र

डिजिटल डेस्क | भारतीय सामाजिक इतिहास में 1 जनवरी केवल कैलेंडर की एक तिथि नहीं, बल्कि समानता, आत्मसम्मान और संघर्ष की प्रतीकात्मक स्मृति है। महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में स्थित भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी 1818 को लड़ी गई ऐतिहासिक लड़ाई ने सदियों से चले आ रहे सामाजिक अन्याय के विरुद्ध एक निर्णायक मोड़ प्रदान किया। 208 वर्षों बाद भी यह घटना लोकतांत्रिक चेतना और सामाजिक न्याय की प्रेरणा बनी हुई है।

18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पेशवाकालीन शासन सामाजिक भेदभाव और जातिगत कठोरताओं के लिए जाना जाता था। वंचित वर्गों, विशेषकर महार समाज, को अपमानजनक जीवन स्थितियों का सामना करना पड़ता था। इसी काल में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में महार सैनिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।

1 जनवरी 1818 को भीमा नदी के तट पर कोरेगांव गांव के समीप पेशवा बाजीराव द्वितीय की विशाल सेना और अपेक्षाकृत कम संख्या वाली ब्रिटिश सेना के बीच युद्ध हुआ। संसाधनों और संख्या में असमानता के बावजूद महार सैनिकों के अद्वितीय साहस और अनुशासन ने युद्ध का परिणाम बदल दिया।

इस युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में कोरेगांव में विजय स्तंभ स्थापित किया गया। इस स्तंभ पर 22 महार सैनिकों के नाम अंकित हैं। यह स्मारक केवल सैन्य विजय का नहीं, बल्कि सामाजिक स्वाभिमान और प्रतिरोध की स्थायी गवाही है।

भारतरत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भीमा कोरेगांव की विजय को दलित समाज की ऐतिहासिक चेतना का महत्वपूर्ण पड़ाव माना। वर्ष 1927 में उनके आगमन के बाद यह स्थल सामाजिक जागरण और अधिकार चेतना का केंद्र बन गया। तभी से हर वर्ष 1 जनवरी को देश-विदेश से लाखों लोग यहाँ एकत्र होकर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं।

208वाँ विजय दिवस ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब समाज के समक्ष समानता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की चुनौती है। भीमा कोरेगांव हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की मजबूती इतिहास की स्मृति, सामाजिक एकता और नागरिक चेतना से जुड़ी होती है।

भीमा कोरेगांव की ऐतिहासिक विजय यह संदेश देती है कि आत्मसम्मान और संगठन के बल पर अन्याय के विरुद्ध खड़ा समाज इतिहास रच सकता है। 1 जनवरी 2026 को मनाया जाने वाला 208वाँ विजय दिवस केवल अतीत की याद नहीं, बल्कि समतामूलक और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण का संकल्प है।

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