बिजनौर, 22 अक्टूबर। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने खाद्य सुरक्षा विभाग को खाद्य पदार्थों में मिलावट और अधोमानक सामग्री की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए, लेकिन कार्रवाई के दौरान आमजन और गरीबों को अनावश्यक परेशानी न हो।
समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने दूध के नमूनों की संख्या बढ़ाने तथा मिलावटखोरी के मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और छापेमारी करने के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के लाइसेंसों की स्थिति की भी जानकारी ली।
डीएम ने खाद्य पदार्थों के जिन नमूनों की जांच रिपोर्ट प्रयोगशालाओं से अब तक प्राप्त नहीं हुई है, उनके संबंध में संबंधित प्रयोगशालाओं को अनुस्मारक भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जिलाधिकारी स्तर से भी रिमाइंडर भेजा जाए, ताकि रिपोर्ट समय से मिल सके और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही उन्होंने सिविल न्यायालय में लंबित वादों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा।
पुनः इस्तेमाल किए जा रहे खाद्य तेल पर भी निगरानी
जिलाधिकारी ने पुनः उपयोग में लाए जा रहे खाद्य तेल (रीयूज ऑयल) के मामलों में भी प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल सहित अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाए। असुरक्षित और अधोमानक खाद्य सामग्री लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में लापरवाही न बरती जाए।
डीएम ने कहा कि खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना तथा मिलावटखोरी पर अंकुश लगाना है। अधिकारियों को जनहित को प्राथमिकता देते हुए नियमों का पालन सुनिश्चित कराना चाहिए, ताकि विभागीय कार्रवाई से आमजन का विश्वास मजबूत हो। बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन अंशिका दीक्षित सहित खाद्य सुरक्षा विभाग के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।


