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बुद्ध चारिका पथ पर अंतरराष्ट्रीय धम्म यात्रा; बोले—‘यह सिर्फ यात्रा नहीं, मानवता का संदेश है’, और किया आह्वान

— इस पावन दिवस को ‘बुद्ध चारिका दिवस’ के रूप में मनाया जाए

नालंदा (13 दिसम्बर 2025) : प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी नव नालन्दा महाविहार (सम विश्वविद्यालय, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा जेठियन–राजगीर धम्म यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें नव नालंदा महाविहार के शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं, नव नालंदा महाविहार में अध्ययनरत भिक्षु–भिक्षुणियों के अतिरिक्त श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, वियतनाम, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, अमेरिका, जापान, चीन, लाओस आदि देशों से आए बौद्ध श्रद्धालुओं एवं भिक्षुओं ने सहभागिता की ।

विदित हो कि नव नालन्दा महाविहार वर्ष 2014 से इस धम्म यात्रा का निरंतर आयोजन कर रहा है। इस वर्ष भी 12वीं जेठियन–राजगीर धम्म यात्रा का सफल आयोजन नव नालंदा महाविहार ने अपने सहयोगी प्रतिष्ठानों—लाइट ऑफ बुद्धा धम्म फाउंडेशन इंटरनेशनल , बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति, इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन, नई दिल्ली, पर्यटन विभाग, बिहार सरकार तथा जेठियन ग्रामवासियों के सहयोग से किया।

यह यात्रा नव नालन्दा महाविहार के माननीय कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में जेठियन ग्राम (प्राचीन नाम: यष्ठिवन), जिला गया से प्रारंभ होकर प्राचीन बुद्ध चारिका पथ से होते हुए लगभग 15 किलोमीटर दूर वेणुवन, राजगीर, जिला नालंदा में सम्पन्न हुई। इस वर्ष लगभग 1500 धम्म यात्रीयों एवं श्रद्धालुओं ने यात्रा में भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक आयाम प्रदान किया।

यह वही पावन मार्ग है जिससे भगवान बुद्ध सम्यक सम्बोधि प्राप्ति के पश्चात सारनाथ में धम्मचक्र प्रवर्तन के बाद मगधराज बिम्बिसार से मिलने राजगृह आए थे। मगधराज बिम्बिसार ने यष्ठिवन (वर्तमान जेठियन) में स्वयं उपस्थित होकर तथागत का स्वागत किया तथा आदरपूर्वक उन्हें राजकीय उद्यान वेणुवन में ठहराया जिसे बाद में उन्होंने दानस्वरूप भिक्षुसंघ को अर्पित कर दिया।

इस अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह अपने विस्तृत उद्बोधन में कहा कि यह मार्ग केवल एक ऐतिहासिक पथ नहीं, बल्कि बुद्धत्व की ओर अग्रसर मानवता के कदमों की गूंज है। भगवान बुद्ध ने अपने जीवन में अनेक बार इसी मार्ग से चारिका की, अनगिनत उपदेश दिए, और यही पथ फ़ाह्यान और ह्वेनसांग जैसे महान बौद्ध यात्रियों की आध्यात्मिक यात्रा का मौन साक्षी रहा है। यह धम्म यात्रा केवल स्मरण का आयोजन नहीं, बल्कि शांति, करुणा और सह-अस्तित्व की उस अमर परंपरा का पुनर्जीवन है, जिसे बुद्ध ने संसार को दिया । अतः यह पूर्णतः न्यायसंगत है कि इस दिवस को ‘बुद्धचारिका दिवस’ के रूप में घोषित किया जाए । माननीय कुलपति महोदय ने गया एवं नालंदा जिला प्रशासन तथा वन विभाग के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक सहयोग के बिना इतने व्यापक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन को सफलतापूर्वक सम्पन्न करना संभव नहीं है। जिला प्रशासन तथा वन विभाग ने जिस तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ सहयोग प्रदान किया है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है । यह धम्म यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि हमारे देश और बिहार की आध्यात्मिक गाथा का सशक्त प्रतीक है । आज जब सम्पूर्ण विश्व शांति के मार्ग की तलाश में है, ऐसे समय में यह पावन यात्रा बिहार की ओर से मानवता के लिए एक प्रेरक संदेश प्रस्तुत करती है । इस अवसर पर अतरी विधानसभा के माननीय विधायक श्री रोमित कुमार ने भी धम्म यात्री को सम्बोधित किया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उप सचिव श्री नद़ीम अहमद; वागमों डिक्सी; रिचर्ड डिक्सी; नव नालंदा महाविहार की कुलसचिव प्रो. रूबी कुमारी; विभिन्न बौद्ध मठों के मुख्य भिक्षु; बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधि आदि विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी सहभागिता रही । इस पूरी यात्रा कार्यक्रम का सुसंचालन एवं समन्वयन नव नालंदा महाविहार के बौद्ध अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफ़ेसर डॉ. सुरेश कुमार द्वारा किया गया ।

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